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Scribble 3




I am in slippers, I am in shorts
Who cares I am with friends
People are laughing looking at us
Who cares I am with friends
I don't have to do my hair
I don't need to need to impress
I am laughing like an idiot
I am drunk like hell
I don't feel scared anymore
I have to pretend no more
Some idiot thinks I am useless?
Who cares I am with friends
My ex didn't look back
Who cares I am with friends
I eat, drink, buy, text, walk, think, talk and breathe the way I want
Don't bother me I am with friends



Comments

  1. Hi! I just wanted to ask if you ever have any issues with hackers?

    My last blog (wordpress) was hacked and I ended up losing months of
    hard work due to no back up. Do you have any methods to protect against hackers?
    Also see my site: Looking for Fashion

    ReplyDelete
  2. Haven't had any till now but seriously I don't have any such plan. Would check your place.

    ReplyDelete

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मेरी कहानी बिखर गयी

खोले डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी बिखर गयी

कुछ सपने गिरे कवर के छेद से
जैसे रिहा हुए हों क़ैद से

मिली लाश कुछ वादों की वहाँ
ना जाने कब किए थे खुदसे और कहाँ

कुछ पन्नो बाद वो बे-अदब ‘मैं’ भी निकला
ना डर था जिससे और ना कोई परवाह

बे-अदब ‘मैं’ मुझसे पूछता है
ये यहाँ एक अजीब सा शोर क्यूँ है
तेरी सोच में आगे निकालने की होड़ क्यूँ है
ये क्या तेरी आम सी ज़िंदगी है
ये कौन है तू
ये क्या बन गया है तू

समझ ए बे-अदब
नासमझ है इसीलिए तो हराम है तू
दुनिए के कितने कायदों से अंजान है तू
कुछ सलीखा सीख ले जीने का अब तो
नुस्खे ले कामयाबी के अब तो

किन कायदों की बात करता है तू
किन वादों की बात करता है तू
देख खुद को आईनो मे कभी
क्या था और क्या है अब तू

सुन ओ क़ायदे पढ़ने वाले
सुन ओ सलीखे सिखाने वाले
तू कोई मसखरा तो नहीँ
क्योंकि तू ‘मैं’ तो नहीं हो सकता

कहाँ गयी है मेरी वो बेपरवाही
कहाँ है मेरा वो…

'ठा से' चुप करवाया फिर उसे
कवर, पन्नो और ड्रॉयर में दबाया फिर उसे

बंद किए डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी दफ़्न हुई

Yaad Rahunga

याद रहूँगा मैं क्या तुमको
बादल जब मेरी स्याही बरसायेंगे

कितनी बारिशें, कितने मौसम
मेरे ख़त बन जाएंगे

दो पल हों जो पास तुम्हारे
मुट्ठी में तुम मेरी कहानी पकड़ लेना

कभी जो तुम हो थोड़ी अकेली
इसे इत्मीनान से पढ़ लेना

दूर सही मैं और न तुमको ज़रुरत
पर इन साँसों को भी हिचकी का सहारा दे देना

याद रहूँगा मैं क्या तुमको
बादल जब मेरी स्याही बरसायेंगे

कितनी बारिशें, कितने मौसम
मेरे ख़त बन जाएंगे

Zinda Hu Abhi

चल थोड़ी आज बेपरवाही कर लें
कुछ देर के लिए ज़रा आंखें बंद कर लें

चल देखें एक सुबह को शाम बनते हुए
कुछ आते-जाते लोग और कुछ पंछी उड़ते हुए

कुछ वक़्त मिले तो सुनूं साँसों को अपनी
हो जाए इनके आने जाने की भी तस्सली

कुछ देर ग़ुमान करूँ फिर ज़िंदा होने का
गिरवी हूँ तो क्या अभी मोहलत है थोड़ी  

कुछ देर ना डर, न ख्वाईश, न चाह  ना मक़सद और ना ज़रुरत हो तेरी
कुछ पल, कुछ गंटे तो बस यहाँ शख्सियत हो मेरी