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Life on Facebook





My life is scattered in the pages of Facebook
Like some spots of dried ink in my notebook
A few pics here and a few updates there
As I said scattered in the pages somewhere

My Life is scattered in the pages of Facebook
With a lot of pictures in the self click look
Some posts remind me of the crushes I had
Some random tags that say that I am not that bad

My life is scattered in the pages of Facebook
Struggling to locate the turns my life has ever took
I find some comments from the people I don't know
And some pics telling that how fast the kids grow

My life is scattered through the pages of Facebook
With bruises and medals of life's accounts book
This is the only thing I have ever called mine
It is my breath, my food, my sleep and my sunshine.

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मेरी कहानी बिखर गयी

खोले डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी बिखर गयी

कुछ सपने गिरे कवर के छेद से
जैसे रिहा हुए हों क़ैद से

मिली लाश कुछ वादों की वहाँ
ना जाने कब किए थे खुदसे और कहाँ

कुछ पन्नो बाद वो बे-अदब ‘मैं’ भी निकला
ना डर था जिससे और ना कोई परवाह

बे-अदब ‘मैं’ मुझसे पूछता है
ये यहाँ एक अजीब सा शोर क्यूँ है
तेरी सोच में आगे निकालने की होड़ क्यूँ है
ये क्या तेरी आम सी ज़िंदगी है
ये कौन है तू
ये क्या बन गया है तू

समझ ए बे-अदब
नासमझ है इसीलिए तो हराम है तू
दुनिए के कितने कायदों से अंजान है तू
कुछ सलीखा सीख ले जीने का अब तो
नुस्खे ले कामयाबी के अब तो

किन कायदों की बात करता है तू
किन वादों की बात करता है तू
देख खुद को आईनो मे कभी
क्या था और क्या है अब तू

सुन ओ क़ायदे पढ़ने वाले
सुन ओ सलीखे सिखाने वाले
तू कोई मसखरा तो नहीँ
क्योंकि तू ‘मैं’ तो नहीं हो सकता

कहाँ गयी है मेरी वो बेपरवाही
कहाँ है मेरा वो…

'ठा से' चुप करवाया फिर उसे
कवर, पन्नो और ड्रॉयर में दबाया फिर उसे

बंद किए डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी दफ़्न हुई

Zinda Hu Abhi

चल थोड़ी आज बेपरवाही कर लें
कुछ देर के लिए ज़रा आंखें बंद कर लें

चल देखें एक सुबह को शाम बनते हुए
कुछ आते-जाते लोग और कुछ पंछी उड़ते हुए

कुछ वक़्त मिले तो सुनूं साँसों को अपनी
हो जाए इनके आने जाने की भी तस्सली

कुछ देर ग़ुमान करूँ फिर ज़िंदा होने का
गिरवी हूँ तो क्या अभी मोहलत है थोड़ी  

कुछ देर ना डर, न ख्वाईश, न चाह  ना मक़सद और ना ज़रुरत हो तेरी
कुछ पल, कुछ गंटे तो बस यहाँ शख्सियत हो मेरी

The Summoning

It’s been a while precious Let’s just give it up my friend Do you think they care It’s difficult for us. It’s difficult to carry the body This white, this white isn’t worthy of our greatness Why do you have to do it Why do you have to carry this one The shiny dream, the flawless look, the brightness of the sun
It’s been a while Let’s just pick the worn one today The dark one, the imperfect one, the natural one Doesn’t it tempt us precious The grin look at it precious. It’s us. Grace of the manner-less The one, the only one The arrogant one, the happy one Let’s call him in precious