Skip to main content

मेरी कहानी बिखर गयी

खोले डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी बिखर गयी

कुछ सपने गिरे कवर के छेद से
जैसे रिहा हुए हों क़ैद से

मिली लाश कुछ वादों की वहाँ
ना जाने कब किए थे खुदसे और कहाँ

कुछ पन्नो बाद वो बे-अदब ‘मैं’ भी निकला
ना डर था जिससे और ना कोई परवाह

बे-अदब ‘मैं’ मुझसे पूछता है
ये यहाँ एक अजीब सा शोर क्यूँ है
तेरी सोच में आगे निकालने की होड़ क्यूँ है
ये क्या तेरी आम सी ज़िंदगी है
ये कौन है तू
ये क्या बन गया है तू

समझ ए बे-अदब
नासमझ है इसीलिए तो हराम है तू
दुनिए के कितने कायदों से अंजान है तू
कुछ सलीखा सीख ले जीने का अब तो
नुस्खे ले कामयाबी के अब तो

किन कायदों की बात करता है तू
किन वादों की बात करता है तू
देख खुद को आईनो मे कभी
क्या था और क्या है अब तू

सुन ओ क़ायदे पढ़ने वाले
सुन ओ सलीखे सिखाने वाले
तू कोई मसखरा तो नहीँ
क्योंकि तू ‘मैं’ तो नहीं हो सकता

कहाँ गयी है मेरी वो बेपरवाही
कहाँ है मेरा वो…

'ठा से' चुप करवाया फिर उसे
कवर, पन्नो और ड्रॉयर में दबाया फिर उसे

बंद किए डाइयरी के कुछ पुराने पन्ने अभी
और मेरी कहानी दफ़्न हुई

Comments

Post a Comment